बन गया फाइनल ब्लूप्रिंट! जानिए कैसा होगा अयोध्या में राममंदिर

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अयोध्या: रामलला को जमा करना पड़ेगा 2 करोड़ रुपये का विकास शुल्‍क, पास हुआ राम मंदिर का नक्‍शा
अयोध्या: रामलला को जमा करना पड़ेगा 2 करोड़ रुपये का विकास शुल्‍क, पास हुआ राम मंदिर का नक्‍शा

अयोध्या में बनने वाले रामलला मंदिर के डिजाइन पर लग रहे कयास अब खत्म हो गये हैं। रामजन्मभूमि पर बनने वाले इस मंदिर पर कभी 5 तो कभी तीन शिखर होने के दावे किए जाते रहे हैं। पर अब रामलला के इस मंदिर का फाइनल ब्लूप्रिंट बनकर तैयार हो गया। इस ब्लूप्रिंट को साधू संतों और श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी पास कर दिया है।

कैसा होगा रामलला का मंदिर

चंद्रकांत सोमपुरा और उनके दो बेटों के बनाए गये इस नए लेआउट के मुताबिक मंदिर पहले अधिक भव्य बनेगा। इसमें तीन या पांच नहीं, बल्कि छह शिखर होंगे। एक मुख्य शिखर और पांच उपशिखर। पहले के मंदिर का परकोटा एक एकड़ से भी कम आकार का था पर अब इस नए डिजाइन में परकोटा भी करीब पांच एकड़ में फैला रहेगा। इससे एक साथ 50 हजार रामभक्त अपने आराध्य के दर्शन कर सकेंगे।

क्या हुए हैं बदलाव

नए माडल मे बनने वाले पांच उपशिखरों में से तीन उप शिखर मुख्य शिखर के सामने और दो उप शिखर मुख्य शिखर के अगल-बगल होंगे। पहले मंदिर में सिर्फ दो तल प्रस्तावित थे पर मंदिर की ऊंचाई 128 से 161 फीट बढ़ जाने के कारण अब इसमें तीन तल होंगे। हर तल पर 106 स्तंभ लगने हैं ऐसे में अब मंदिर में लगने वाले स्तंभों की संख्या 212 से बढ़कर 318 हो गई है। ये स्तंभ आठ फीट की चौडाई और 16 फीट की ऊंचाई तक होंगे और इनमें से हर स्तंभ पर स्तंभ 16 मूर्तियां नक्काशी कर उभारी जाएंगी। ये मूर्तियां यक्ष-यक्षिणी और गणों की होंगी।

क्या होगा हर तल पर

नए डिजाइन में पुराने डिजाइन की तरह ही आठ कोण का यानी अष्टकोणीय गर्भगृह बनाया जाएगा। ये पहले तल पर होगा जहां पर श्रद्धालु रामलला यानि बाल्यकाल के श्रीराम का दर्शन करेंगे वहीं दूसरे तल पर रामदरबार होगा जिसमें श्रीराम के साथ ही देवी सीता, महाबली हनुमान, लक्ष्मण, भरत, शत्रुध्न जी के दर्शन होंगे। अभी तीसरे तल को लेकर कोई ठोस योजना नहीं बनी है पर माना जा रहा है कि इस तल को भी रामसंस्कृति के चित्रों और कलाकृतियों से सजाया जा सकता है। इस मंदिर में एक उपशिखर के नीचे नृत्य मंडप और भजन मंडप भी होगा।

किसने बनाया है ये डिजाइन

37 साल पहले विहिप नेता अशोक सिंघल के कहने पर सबसे पहले देश के जाने माने वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा ने तीन शिखरों वाला नागरी शैली का उपयोग कर मंदिर का ले आउट और थ्रीडी डिजाइन बनाया था। सुप्रीम कोर्ट में फैसला आने के बाद इसे भव्य करने की मांग उठने लगी। इसके बाद चंद्रकांत सोमपुरा ने अपने दो वास्तुविद बेटों आशीष एवं निखिल सोमपुरा के साथ मिलकर नए और भव्य डिजाइन पर काम किया है। इस ब्लूप्रिंट पर पिछले शनिवार को स्थानीय सर्किट हाउस में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक  में अंतिम मुहर लगा दी गयी।

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