सीसीआई की आरआरवीएल और फ्यूचर ग्रुप सौदे पर मुहर

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बंद होने से दो दिन पहले ही रिलायंस का राइट्स इश्यू ओवर सब्सक्राइब
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नयी दिल्ली: मुकेश अंबानी की रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (आरआरवीएल) के फ्यूचर ग्रुप के खुदरा कारोबार के अधिग्रहण पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने मुहर लगा दी।

इस सौदे पर विश्व की खुदरा महारथी अमेजन की आपत्ति के बाद विवाद हो गया है। सीसीआई की मंजूरी रिलायंस के लिये बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अमेजन का आरोप है कि सौदे में फ्यूचर ग्रुप ने अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं किया है। सौदे को रोकने के लिये अमेजन ने सीसीआई में भी दस्तक दी थी किंतु आयोग ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और फ्यूचर रिटेल के पक्ष में फैसला दिया है। अमेजन ने सेबी में भी सौदे पर आपत्ति दर्ज कराई है। अमेजन ने सीसीआई और सेबी में सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत के सौदे पर रोक के आदेश के आधार पर इसे मंजूरी नहीं देने का अनुरोध किया था।

पिछले महीने रिलायंस इंडस्ट्रीज-फ्य़ूचर ग्रुप डील मामले में मध्यस्थता अदालत सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर से अमेजन को अंतरिम राहत मिली थी। अदालत ने अमेजन की याचिका पर अंतरिम राहत देते हुए फ्यूचर ग्रुप पर रिलायंस इंडस्ट्रीज को खुदरा कारोबार बेचने पर रोक लगाई है। अदालत के मुताबिक यह रोक मामले पर अंतिम फैसला आने तक रहेगी। अमेजन ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि फ्यूचर ग्रुप ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ सौदे में उसके साथ हुए अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं किया है। दोनो पक्षों के बीच हुए सौदे में अमेजन की सहमति नहीं ली गई, इसलिए इस सौदे को लेकर अमेजन ने अदालत का रुख किया।

रिलायंस इंडस्ट्रीज की अनुषंगी आरआरवीएल ने अगस्त में फ्यूचर समूह के साथ सौदा किया था। सौदे में फ्यूचर ग्रुप के रिटेल, थोक और लॉजिस्टिक्स कारोबार का अधिग्रहण 24713 करोड़ रुपये में हुआ है।  पिछले साल अगस्त में अमेजन ने फ्यूचर कूपंस में 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। बाद में फ्यूचर रिटेल में अमेजन ने 7.3 फीसदी की हिस्सेदारी खरीदी थी।

गुरुवार को ही आरआरवीएल ने कंपनी में 10.09 प्रतिशत इक्विटी बेचकर 47265 करोड़ रुपये जुटाने के मौजूदा चरण की प्रक्रिया पूरा करने का ऐलान किया था। इस राशि के बदले निवेशकों को 69 करोड़ 27 लाख 81 हजार 234 इक्विटी शेयर आवंटित किये गये हैं।

आरआरवीएल ने सिल्वर लेक पार्टनर, केकेआर, जीआईसी, टीपीजी और जनरल अटलांटिक के साथ-साथ सरकारी संपत्ति कोष मुबाडाला, एडीआईए और पीआईएफ को बेचकर यह राशि जुटाई है।

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