यूपी के इस डॉक्टर की देखरेख में बनेगी भारत की पहली कोरोना वैक्सीन

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यूपी: पिछले 24 घंटो में 3800 के पार पहुंचा कोरोना मरीजों का आंकड़ा, प्रदेश में 60 की मौत
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कोरोना के खिलाफ जंग में उतरने को भारत की पहली वैक्सीन परीक्षण को दौर से गुज़र रही है। इस वैक्सीन को जानवरों पर सफल परीक्षण किया जा चुका है। शोध के एडवांस स्टेज पर पहुंच चुकी इस वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल 24 जुलाई से शुरु हो रहा है। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। भारत की इस वैक्सीन का नाम कोवैक्सीन है जिसका ट्रायल देश कई बड़े चिकित्सा संस्थानों जैसे एम्स और पीजीआई में किया जा रहा है। इस ट्रायल के पहले दिन यानी शुक्रवार को इस वैक्सीन की डोज़ दो लोगों को दी जाएगी।

तीन फेज़ में पूरा होगा ट्रायल-

इस ट्रायल से जुड़े एम्स के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ संजय राय के मुताबिक इस वैक्सीन का ट्रायल तीन फेज़ में किया जाएगा।डॉ .संजय राय उत्तर प्रदेश के बलिया के रहने वाले है और उन्होंने मेडिकल की पूरी पढ़ाई यूपी से ही की है।  तीनों चरणों के सफल होने के बाद यह वैक्सीन बाज़ार में उतारी जाएगी। आईसीएमआर की माने तो यह वैक्सीन इस साल के अंत या अगले साल के शुरुआती महीनों में आ सकती है। इससे पहले ही तीनों फेज़ के परिणामों पर गहनता से विचार किया जाएगा।पहले फेज़ में 100 लोगों पर होने वाला परीक्षण दिल्ली के एम्स में होगा। फिलहाल इस परीक्षण को दिल्ली के लोगों तक ही सीमित रखा गया है जिससे उन लोगों का आसानी से फ़ॉलो अप किया जा सके।इसके बाद एम्स के साथ ही देश भर में 12 अन्य सेंटर्स पर 275 लोगों को ह्युमन ट्रायल में शामिल किया जाएगा। कुल मिलाकर पहले चरण में 375 लोग इस वैक्सीन के पहले ट्रायल में शामिल होंगे।

कैसा होगा दूसरा चरण

जहां वैक्सीन के पहले ट्रायल में आईसीएमआर,भारत बायोटेक, और इंडियन इस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी का फोकस सुरक्षा पर है वहीं दूसरे चरण में सैम्पल साइज़ को बढ़ाकर 450 किया जाएगा।पहले चरण में वैक्सीन के असर और लोगों की वैक्सीन डोज़ के रिएक्शन पर काम किया जा रहा है वहीं दूसरे चरण में इस वैक्सीन के प्रभाव और शरीर पर उसके असर पर गहनता से अध्ययन किया जाएगा।

तीसरा चरण होगा सबसे बड़ा-

दो चरणों में सफलता मिलने पर वैक्सीन का तीसरा और आखिरी चरण शुरु होगा जो सबसे बड़ा होने वाला है ।इस चरण में हज़ारों लोगों को वैक्सीन देकर यह ट्रायल किया जाएगा कि लोगों के शरीर में इसस कितनी एंटीबॉडीज़ बन रही हैं।इस दौरान हर मरीज़ का 6 महीने तक फालो अप किया जाएगा

किन लोगों पर किया जाएगा ट्रायल—

ट्रायल के लिए 18 से 55 वर्ष तक के ऐसे लोगों को चुना जाएगा जो पूरी तरह स्वस्थ्य हों ।इसके साथ ही इन लोगों को कोरोना बीमारी ना हुई हो ,यह भी ट्रायल की अहम शर्त है।इस वैक्सीन के पहले फेज़ के ट्रायल के लिए 100 लोगों की ही ज़रूरत थी लेकिन 1800 लोगों ने इस ट्रायल में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है।

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